Posts

Showing posts from April, 2016

सोचा न था

जिन किनारों पे अपना घर ना था  | वही मंजिल बना लिया  दूर तक चलने को कदम भी बढ़ा लिया जिन चिरागों से डर था जल जाने का उन्ही को किस्मत बना लिया