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वक़्त और सफर

वक़्त के कितने रंग है, शायद समझ आता | बैठे न होते खामोश और कुछ कह पता || ऑंखें तो यु बंद और खुलती है ख्वाबो के सहारे भी काश उजालो में दुनिया के शोर से जग जाता ||
कुछ दूर ही था मंज़िल का वो लम्हा जिन राहो पे हम चल पड़े थे। कुछ अनजाना - कुछ जाना सा लग रहा था हर मोड़, जब ये आँखे ख्वाबो से लिपट पड़े थे

बेबसी

डुबो देती है हर आँशु आँखों को बड़ी ही ख़ामोशी से। और हम दिल का दर्द किसी को दिखा भी नही पाते। सोचते है शायद वक़्त का इल्म ही यही है ।। जो किसी को चाह कर भी  समझा नही पाते।। खुद की पर...

ख्याल

गुजरे ज़माने की हर बात ढूंढ़ता हुँ | भूल बैठा हूँ  पर दिन रात  ढूंढ़ता हुँ  || मेरी जिंदगी किस मोड़ पे है, ये हालात  ढूंढ़ता हुँ । राहो  में दिन रात  ढूंढ़ता हुँ  । कोई पल नही "जो निकल जाऊ " उस मोड़  से । बस  आँखे नाम न हो "वो " जजबात ढूंढ़ता हुँ ।। कई सफर बिताये  वक़्त के साथ मगर , फिर भी हर मोड़ पे, अपनी कयानात ढूंढ़ता हुँ ॥ रुक सी गयी है हालात की हर वो  रंग जिन्हे मै हर शाम ढूंढ़ता हुँ । मेरी तक़दीर का  कोई फ़साना लिख दिया जो मुकमल थी हांथो की गह्रइयो में मै वही लकीर ढूंढ़ता हुँ ॥ आज हम खुद  को तन्हाइयो में महसूस करे भी  किसके साथ न वफ़ा रहा ,न सुकून रहा मेरी आँखे जो नम है उसकी वजह ढूंढ़ता हुँ खुदा जो भी करता है, नही करता खुद के बदौलत बस उसकी एक इंतहा का सफर ढूंढ़ता हुँ बदलेगी दुनिया हमरी भी ये तो यकीन है बस कौन सा सफर होगा और कैसा  मुसाफिर इन्ही ख्यालातों में खुद को मैं  हर दम ढूंढ़ता हुँ

कुछ पल ही सही

दिल ही दिल को, भरम में जीने दो। आँखों को थोडा आँखों से ही सम्भल जाने दो।। कल क्या है "दुनिया हमारी" जो है अभी इसे जी लेने दो। मुस्कराहट और पलके ढलने का कोई वसूल नही होता। माना की जीवन पत्तो की तरह है, मगर अभी तो उसे  सिमट जाने दो

Thought

ह्रदय का दुखः हमेशा मन से होता है। क्यों की मन में हमेशा एक ह्रदय वास् करता है। ****** हमारे बस में कुछ भी नही है। बस वक़्त ही हर चीज़ का रास्ता ढूंढ लेता है ।। ****** बहुत ढूंढते है हर गुजरे कल को । पर उसे दोहराने 'से' डर लगता है।।

दिल ही दिल से

बहुत चाह है अपनी "ख्वाबो और उम्मीदो"ं से मगर क़द्र किसका करू।। ढूंडता हूँ हर मंजील को "वक़्त और हांथो" के लकीरो से मगर यकीन किसका करू।। **** मुददते तो बहुत मिली, जिंदगी बनाने की मगर जिंदगी से ही ,डर लगता है ।। ढलती है शाम "जब" उजालो से लिपट कर ना जाने क्यु फिर "उजालो" से डर लगता है।। सोचता हुँ मिटा दू "हर एक उन लम्हों"को अपनी जिंदगी से तो आँखों में किसी के "आंसू " लाने से डर लगता है।। * * * * ना जाने हमें ऐसा हर कदम पे लगता है,हर कदम पे लगता है ***** बदलती दुनिया की , हर लब्ज़ दीवानी है। कोई कहता है , ये रिश्ता पुरानी है।। तो कोई कहता है , दुनिया ही बेगानी है।।। ***** चांदनी रात में,ख्वाबो से डर लगता है। सफर में अपने  जज्बातों से,डर लगता है।। ना जाने कब तक किसी की याद आएगी । यही सोच कर हर पल "जी कर" भी एक पल से डर लगता है ***** कभी उलझन भरे ख्वाब ,तो कभी उलझन भरे चाह हमेशा जुबा को बंद कर देती है।। ***** कभी मुजरिम नजर आता हुँ ,वक़्त के पैमानों में। कभी खुद ही सम्भल जाता हुँ, वक़्त के ...