कुछ पल ही सही

दिल ही दिल को, भरम में जीने दो।
आँखों को थोडा आँखों से ही सम्भल जाने दो।।
कल क्या है "दुनिया हमारी" जो है अभी इसे जी लेने दो।
मुस्कराहट और पलके ढलने का कोई वसूल नही होता।
माना की जीवन पत्तो की तरह है, मगर अभी तो उसे सिमट जाने दो

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