अभी रात काफी है ,मेरे दिल की बात बाकी है
जुल्फ जो इतने घने है, "की" मेरे आँखों की सब्र रात बाकी है 
इतना ना उलझाओ खुद को ,अभी मेरे एहसास बाकी है 
तू चाँद को देख घबरा मत जाना ,मेरी निगाहो का महताब बाकी है
तेरे तल्कियो और मोहब्बत को पिरो कर रखा हुँ इस खँडहर दिल में 
शायद सांसो में उस वक़्त की कुछ सौगात बाकी है

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