कोई सीखा रहा था मोहब्त करने कि शबब
पर वक़्त का कोई हमे तकाजा ना था 
बस सब भूल कर हम लिपटे रहे उनके हर एक दर्मिया से 
जिसका हमे कोई अंदाजा ना था
कोई कशिश ही उनकी खीच लाती थी अपनी तरफ
वरना उस मोड पे कभी हमे आना ना था

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