मौसम तो हसी है, मगर वक़्त के दायरे है |
दिलकश तो दिल है, मगर जुबा के दायरे है |
कोई पहचान है मगर सोच के दायरे है |
उलझी है नज़्म दिल कि, मगर नजरो के दायरे है |
चलती है कदम, मगर सफ़र के दायरे है |
छोड़ दू अगर कार्ल कि बात तो क्या होगा |
अब हर तरफ तो अपनी एहसासों के दायरे है |

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