बेकौफ थी जिन्दगी मेरी मगर अब तो सुकून छीन लिया
एक जिन्दगी की तलास में खुद को ही खुद से कितना दूर कर लिया
रो लेता हु बीते वक़्त को याद कर के कि आज किस मोड़ खुद खड़ा कर लिया
मफिल भी है मुस्कान भी है चहरे पे हज़ार
मगर वक़त के आगे कितना गुनाह कर लिया
एक जिन्दगी की तलास में खुद को ही खुद से कितना दूर कर लिया
रो लेता हु बीते वक़्त को याद कर के कि आज किस मोड़ खुद खड़ा कर लिया
मफिल भी है मुस्कान भी है चहरे पे हज़ार
मगर वक़त के आगे कितना गुनाह कर लिया
Comments
Post a Comment